दुनिया के सबसे बड़ा धर्म प्रवर्तक – सिद्धार्थ गौतम बुद्ध

धर्म मनुष्‍य सभ्‍यता के शुरुआती दौर से ही अहम भूमिका निभाता रहा है। दुनिया की सबसे पुरानी और प्राचीन संस्‍कृतियों का संबंध किसी न किसी धर्म से रहा है और ये धर्म अपने प्रचलित धारणाओं के बूते पूरी मनुष्‍य सभ्‍यता, संस्‍कृति को प्रभावित करते रहे हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि सभ्‍यता के इतिहास में पैगम्‍बर, ईश्‍वरीय दूतों ने ही धर्म को शुरू किया और एक तरह से वे धर्म संस्‍थापकों भूमिका में रहे। चाहे फिर वह ईसा मसीह हो, मोहम्‍मद पैगम्‍बर हो, गुरुनानक हो या कोई दूसरा महापुरुष। सभी ने अपनी तरह से पूरी मानवजाति को एकता, भाईचारे और ईश्‍वरीय गुणों की ओर चलने के लिए प्रेरित किया।

भारत से था दुनिया का सबसे बड़ा धर्म प्रवर्तक, दिग्‍गज आधुनिक, विज्ञानवादी भी हुए अनुयायी..!

ज्ञान और आध्‍यात्‍म को लेकर पूरी दुनिया को यदि सबसे ज्‍यादा किसी ने दिया है तो वह भारत ने ही दिया है। ऐसे ही एक महान महापुरुष ने भारत से ही निकलकर पूरी दुनिया को अपने ज्ञान के प्रकाश से भर दिया।

भारतीय उपमहाद्वीप में भी ऐसा ही एक पैगम्‍बर या ईश्‍वरीय दूत रहा, जिसने पुरातन समय से लेकर आधुनिक युग तक पूरी दुनिया को सबसे ज्‍यादा प्रभावित किया और उसे एक तरह से लाइट ऑफ एशिया  कहा गया। इसका नाम था सिद्धार्थ गौतम बुद्ध, जिसने बौद्ध धर्म चलाया और पूरी दुनिया के सामने ईश्‍वर की नई अवधारणा को सामने रखा।

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईस्वी पूर्व हुआ था। गौतम विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक बौद्ध धर्म के प्रवर्तक रहे। उनका जन्म क्षत्रिय कुल के शाक्य नरेश शुद्धोधन के घर में हुआ था। बुद्ध अपने बाल्‍यकाल से ही सभी को प्रभावित करने लगे और युवावस्‍था तक आते-आते विवाहोपरांत नवजात शिशु राहुल, पत्नी यशोधरा को त्यागकर संसार को जरा, मरण और दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश में रात जंगल चले गए। यही वही कहानी है, जो पूरी दुनिया को गौतम के प्रति आज भी आकर्षित करती है।

राजपाट का वैभव छोड़ने के बाद सालों जंगलों, कंदराओं, पहाड़ों की खाक छानने के बाद आखिरकार बुद्ध को  बोधी वृक्ष के नीचे उस ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिसने आगे चलकर बौद्ध धर्म का रूप ले लिया। बुद्ध का ज्ञान प्रचलित धर्मों और खासकर उस दौर के महत्‍वपूर्ण धर्मों हिंदू धर्म और जैन धर्म से बिल्‍कुल अलग था और इसमें सम्‍यक साधना के माध्‍यम से जीवन से दुखों की निवृत्‍ति का मार्ग बताया गया था।

बहरहाल, आज भी पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म सर्वाधिक प्रचलित विश्‍व के सर्वाधिक प्राचीन धर्मों में से एक है। इस धर्म की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह सभी जातियों और पंथों के लिए खुला है। उसमें हर आदमी का स्वागत है। इस धर्म का दरवाजा जात-पात, ऊंच-नीच का कोई भेद-भाव से कोसो दूर रहा।

कमाल यह था कि बुद्ध की मृत्‍यु के बाद दिनों-दिन यह धर्म तेजी से फैलता रहा। सम्राट अशोक भी विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अपनी अहम्‌ भूमिका निभाई। मौर्यकाल तक आते-आते भारत से निकलकर बौद्द धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन, श्रीलंका आदि में फैल चुका था। आश्‍चर्य है कि इन देशों में बौद्ध धर्म बहुसंख्यक धर्म है और गौतम बुद्ध इनके भगवान।

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