ऐसे थे हमारे साहेब काँशीराम जी

👏👏 *कांशीराम साहब का समाज के प्रति समर्पण भावना, लगन, निष्ठा तथा परिश्रमी स्वभाव का लोहा हर कोई मानता है।वे शुरू से ही कहा करते थे,’इस शरीर से जितना काम लेना हो ले लेना चाहिए, बाद में तो यह मिट्टी में ही मिलना है।अपनी साईकिल यात्रा के दौरान साहब कहा करते थे मेरे प्रत्येक कार्यकर्ता को प्रतिदिन20किलोमीटर पैदल या साईकिल पर चलना चाहिए और इस परिधि में पड़ने वाले प्रत्येक बहुजन से संपर्क करते हुए उसे आंबेडकरी मिशन की रुपरेखा बतानी चाहिए।चाहे चिलचिलाती धुप हो, चाहे थिकुरते जाड़े और चाहे मूसलाधार बारिश हो।साहब कभी रुके नही, झुके नही।बाहर मौसम की भयानक मार पड़ रही होती और साहब कहते नेचर अपना काम कर रही है और हमे अपना काम करना है।नही तो नेचर के बिरुद्ध हो जाएगा।प्रकृति जब आराम नही कर रही है,तब हम भी क्यों करे।साहब पल-पल का सदुपयोग करते।अकसर कहते जिनको बुद्ध फुले आंबेडकर के सपनो को साकार करना है उन्हें आराम की फुर्सत ही कहां?”*

🙏 *ऐसे थे हमारे साहेब काँशीराम जी जिनसे हमे सीख लेनी चाहिए* !
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💐 *साहब काँशीराम जी को सत् सत् नमन*💐
*जय भीम*