Haryana ka Jadu Song by Sombir Jasrana

On Special Request:  Haryana ka Jadu Song by Sombir Jasrana and AK Hooda Rurkee

 

बौद्ध धम्म की जन्म तिथि :अषाढी पूर्णिमा

आज हैं – बौद्ध धम्म की जन्म तिथि :अषाढी पूर्णिमा
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गौतमबुद्ध के द्वारा प्रथम धम्म उपदेश- धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के अवसर पर आप सब को हार्दिक बधाई, मंगल कामना ।
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बोधिसत्व सिद्धार्थ गौतम छः साल की साधना के बाद वैशाखी पूर्णिमा की रात को सम्यक संबोधि प्राप्त करके बुद्ध हुए ।बोधि वृक्ष के नीचे बुद्धत्व प्राप्त करने के पश्चात गौतमबुद्ध ने सोचा, जो ज्ञान मैंने पाया हैं, जिस दिव्य घटना का मैंने अनुभव किया हैं, वह इतने सूक्ष्म हैं कि शब्दों में उसको कहना कठिन हैं । उन्होंने सोचा कि जो मैंने पाया हैं, वह इतना सूक्ष्म हैं कि शब्दों में उसका बयान नहीं किया जा सकता, सिखाया नहीं जा सकता ।अतः मैं खामोश रहूँगा ।चुप रहूँगा । मैंने जो पाया हैं, वह स्वअनुभव से समझा जा सकता हैं और पाया जा सकता हैं ।अतः मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा ।

बाद में बुद्ध ने अपने ज्ञान को बांट ने का विचार किया ।
पहले आलार कालाम को ज्ञान देने का सोचा । बुद्ध ने अपने दिव्य चक्षु से देखा की आलार कालाम एक सप्ताह पहले मृत्यु प्राप्त कर चुके हैं ।
फिर सोचा कि मैं उद्दक रामपुत्त को ज्ञान बांटु । बुद्ध ने दिव्य ज्ञान से देखा कि उद्दक रामपुत्त अगली रात्रि को मृत्यु पाये हैं ।
फिर बुद्ध के मन में आया कि मेरे पहले पाँच साथी मुझे छोड़कर गये हैं उन्हें ज्ञान देना चाहिए क्योंकि उन्होंने मेरी खुब सेवा की हैं । बुद्ध ने जाना की पाँच साथी अभी वाराणसी के ऋषिपतन मृगदाय में साधना कर रहे हैं । वे पाँच साथी ज्ञान के अधिकारी हैं ।

बुद्ध बोधगया से वाराणसी के तरफ चल पडे । 11 दिन की सफर के बाद बुद्ध अषाढी पूर्णिमा के दिन वाराणसी मृगदाय में पहुंचे ।

उसी दिन बुद्ध ने पंचवर्गिय परिव्राजक को प्रथम धम्म उपदेश दिया ।

जिसे इतिहास में धम्मचक्कप्पवत्तन के नाम से जाना जाता हैं ।

🌳धम्मचक्कप्पवत्तनसुत्त बौद्ध धम्म का सार तत्व हैं ।
🌳 इसी धम्मचक्कप्पवत्तनसुत्त को ही मज्झिमा पटिपदा और आर्य अष्टांगिक मार्ग तथा चार आर्य सत्य भी कहा जाता हैं ।

🔔बुद्ध ने कहा –

भिक्खुओ ! दो अतियों को छोड दो ।
दो अतियों का सेवन करना अनर्थ हैं, अज्ञानता हैं ।
🌿जैसे काम सुख में आसक्त हो लिप्त होना ।
🌿दूसरा, शरीर को अति पीड़ा देना, अति कष्ट देना ।
इन दो अतियों को छोड मैंने मध्यम मार्ग खोजा हैं जो आंख देने वाला हैं, सुख देने वाला हैं , शान्ति देने वाला हैं, ज्ञान देने वाला हैं, आनंद देने वाला हैं ।
मध्यम मार्ग ही आर्य अष्टांगिक मार्ग हैं –

🔔सम्यक दृष्टि,
🔔 सम्यक संकल्प,
🔔 सम्यक वचन,
🔔 सम्यक कर्म,
🔔 सम्यक आजीविका,
🔔सम्यक व्यायाम,
🔔सम्यक स्मृति,
🔔 सम्यक समाधि ।
💐 💐 💐

बुद्ध ने उन्हें चार आर्य सत्य का ज्ञान दिया ।

उन्होंने बताया कि-
दु:ख हैं,
दु:ख का कारण हैं,
दुःख का निरोध हैं और
दु:ख निरोध का मार्ग हैं ।

बुद्ध ने आज अषाढी पूर्णिमा के दिन धम्म चक्क गतिमान किया और आदि कल्याणकारी, मध्ये कल्याणकारी और अंत में भी कल्याणकारी धम्म सर्वे प्राणीओं के हित के लिए, मंगल के लिए, सुख के लिए, निर्वाण के लिए प्रकाशित किया ।

आज के युग में भी बुद्ध का धम्म कल्याणकारी हैं, सिर्फ धम्म के मार्ग पर हमें चलना हैं ।
🍀बुद्ध का धम्म हमारे में विकसित हो और हम दु:ख के छुटकारा पाये यही मंगल कामना के साथ धम्मचक्कप्पवत्तन दिन की मंगल कामना -बधाई ।🍀
💐नमो बुद्धाय 💐
💐नमो धम्माय 💐
💐नमो संघाय 💐
🎄🎄सुप्रभात 🎄🎄

गुजरात के दलितों का मुद्दा संसद में गूँजा

गुजरात में दलितों की पिटाई के बाद वहां दलित समुदाय में भारी गुस्सा है और बुधवार को बुलाए गए गुजरात बंद के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा की घटनाएँ हुई हैं.

ये मुद्दा संसद में भी गूंजा है. राज्यसभा में बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के सांसदों ने इस मुद्दे पर तत्काल बहस की मांग की है. राज्यसभा को कुछ देर के लिए स्थगित भी करना पड़ा है.

बसपा प्रमुख मायावती ने संसद के बाहर कहा, ”दलितों से जुड़ा कोई भी मामला जब बसपा उठाती है, तो आपस में मिले हुए कांग्रेस, भाजपा उस पर राजनीति करने लगते हैं.”

दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत ने संसद के बाहर कहा कि गुजरात सरकार ने मामला सामने आने के बाद तत्काल कड़ी कार्रवाई की है लेकिन विपक्ष न दो संसद में व्यवस्थित ढंग अपनी बात रखना चाहता है और ही सरकार की बात सुनना चाहता है.

उधर गुजरात से पत्रकार प्रशांत दयाल ने बताया है कि सौराष्ट्र में अमरोली, भावनगर, जूनागढ़ और राजकोट ज़िलों में बंद के दौरान बसों पर पथराव हो रहा है स्कूल कॉलेज बंद हैं.

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जूनागढ़ और अहमदाबाद में भी स्कूल कॉलेज बंद कराए गए हैं क्योंकि सरकारी बसों और दफ़्तरों को निशाना बनाया जा रहा है.

ये मुद्दा तब शुरू हुआ जब ग्यारह जुलाई को वेरावल ज़िले के ऊना में कथित गो रक्षकों ने जानवर की खाल उतार रहे चार दलितों की बेरहमी से पिटाई की थी.

इस घटना का वीडियो वायरल हो गया था.

इसके बाद भड़के प्रदर्शनों में पथराव हुए थे जिनमें एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई. विरोध प्रदर्शनों के दौरान 16 दलितों ने आत्महत्या करने की कोशिश की थी.

इनमें से एक युवक की मौत हो गई है. हालांकि प्रशासन का कहना है कि मृत व्यक्ति ने व्यक्तिगत कारणों से ज़हर खाया था. लेकिन दलित संगठन प्रशासन के दावों को नकार रहे हैं.

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल Image 

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल इस मामले में जांच के आदेश दे चुकी हैं. वो पीटे गए दलित युवकों से मिलने ऊना पहुंच गई हैं.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 21 जुलाई को और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का 22 जुलाई को इन पीड़ितों से मिलने का कार्यक्रम है.

अमरेली में मंगलवार को दलितों के प्रदर्शन में हुई पत्थरबाज़ी में एसपी रैंक के एक अधिकारी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हुए थे.

गुजरात में आंदोलन करते दलित.Image 

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को एक ट्वीट कर बताया था कि ऊना की घटना के संबंध में अब तक 16 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

इन लोगों पर अपहरण, लोगों को बंधक बनाने और एसएसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

 

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गुजरात: दलितों के प्रदर्शनों, आगज़नी के बाद तनाव

गुजरात के वेरावल में दलितों की पिटाई का वीडियो वायरल होने और दलितों के उग्र प्रदर्शनों के बाद सौराष्ट्र में स्थिति तनावपूर्ण है. वहां वेरावल, राजकोट, सुरेंद्र नगर और गोंडल बुरी तरह प्रभावित हैं.

पुलिस के अनुसार वेरावल में कथित शिवसेना कार्यकर्ताओं ने पिछले हफ़्ते कुछ दलितों को तब पीटा था जब वो जानवर की खाल उतार रहे थे. हालांकि बाद में गुजरात में शिवसेना ने अपने कार्यकर्ताओं के इस मामले से जुड़े बने से इनकार किया है.

सोमवार को दलितों ने उग्र प्रदर्शन किए थे और पुलिस के अनुसार सात लोगों ने आत्महत्या की कोशिश की थी. इसके बाद मुख्यमंत्री आनंदीबेन ने जांच के आदेश दिए थे और चार पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था.

 

Image copyrightANKUR JAIN

स्थानीय पत्रकार प्रशांत दयाल के अनुसार, जिन दलितों ने आत्महत्या की कोशिश की थी, उनमें से दो की हालत गंभीर है.

उनके मुताबिक़ सोमवार की रात गोंडल, धोराजी और जूनागढ़ हाइवे पर सरकारी बसों को आग लगा दी गई और राजमार्ग जाम कर दिया गया. अब वहाँ बड़ी संख्या में पुुलिस मौजूद है.

गोंडल के डिप्टी एसपी एसएस रघुवंशी ने बीबीसी को बताया कि प्रदर्शनों में हिंसा पर उतर आई भीड़ पर काबू करने के लिए स्टेट रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी गई है और स्थिति नियंत्रण में है.

प्रशांत दयाल के अनुसार दलित समुदाय के लोगों ने पूरे मामले पर अपना विरोध जताने के लिए सौराष्ट्र के सुरेंद्र नगर और गोंडल में सरकारी दफ़्तरों पर मरे हुए जानवर गिरा दिए हैं.

Image copyrightPRASHANT DAYAL

राज्य के कई दलित संगठनों ने 20 जुलाई को गुजरात बंद का ऐलान भी किया है.

गुजरात में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने दलितों के इस आंदोलन को समर्थन दिया है. इसके बाद क्षेत्र में सियासी सरगर्मी भी बढ़ गई है.

पूरे मामले की जाँच अब गुजरात पुलिस की सीआईडी शाखा करेगी. पीड़ित दलित युवकों को चार-चार लाख रुपए का मुआवज़ा देेने की घोषणा हुई है.

मामले की तेज़ सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत बनाने की घोषणा की गई है.

 

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DASFI द्वारा एक विशाल विरोध प्रदर्शन

जिस तरह से गुजरात में हुआ वो बहुत ही निंदनीय घटना है।वैसे तो इस तरह की घटनाये पूरे देश में होती है।लेकिन जिस तरह से गुजरात के भीम सैनिकों ने इसका विरोध किया उनके जज्बे को सलाम।आज देश का पूरा दलित वर्ग आपके साथ है।कल कुरुक्षेत्र में भी इसके विरोध में DASFI व् अन्य अम्बेडकरवादी संगठनो द्वारा एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया जायेगा।पूरे देश में DASFI इसके विरोध में प्रदर्शन करेगा।

रविन्द्र ढांडा,
DASFI

 

DASFI UNIT से जुड़ें

वो सभी साथी जो हरियाणा के किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश ले रहे हैं। आप सबसे निवेदन है कि वहां की DASFI UNIT से जुड़ें।
जैसा कि हरियाणा सरकार के आदेशानुसार छात्र संघ चुनाव जल्दी ही होने वाले हैं, ऐसे में आपका दायित्व बनता है कि आप बहुजन छात्र संगठन को मजबूती प्रदान करें, और आगामी छात्र संघ चुनावों में DASFI को पूर्ण बहुमत से विजयी बनाएं।
राष्ट्र निर्माण और भीम मिशन में यह आपका एक महत्वपूर्ण योगदान होगा।
जय भीम
नमो बुद्धाय
कमल किशोर
प्रदेश महासचिव
Dasfi Haryana

Sanju RJ भाई के जन्मदिवस पर बहुत बहुत बधाई

डॉ अम्बेडकर मिशन को “आरक्षण” “मूलनिवासी” “पाखंडवाद” जैसे क्रांतिकारी गीत देने वाले Sanju RJ भाई के जन्मदिवस पर बहुत बहुत बधाई, हरियाणा का एक ऐसा जाना पहचाना मिशनरी चेहरा जिसको केवल सिंगर कहना बेमानी होगी क्योंकि इन्होंने~~
‪#‎भारत‬ को पहला मिशनरी रैप गीत दिया
‪#‎पुरे‬ उत्तर भारत के युवाओं में गीतों के माध्यम से ऊर्जा का संचार किया
‪#‎लगभग‬ 200 प्रोग्राम कर चुके है जिनसे लाखो युवा मिशन में जुड़े है
‪#‎किसी‬ भी स्टेज शो के लिए अभी तक कोई फ़ीस नही ली है
‪#‎केवल‬ मंच पर ही नही बल्कि सड़क पर उतरकर भी जारी रहता है इनका मिशन चाहे रोहित वेमुला केश हो या भगाना कांड
#केवल संगीतमय कार्यक्रम में ही नही बल्कि वक़्ता के तौर पर भी पहचान बनाई है
‪#‎सिंगर‬ होने के साथ ही बहुत क्रन्तिकारी गीतकार भी है
‪#‎अपने‬ गीतों में खुद ही रैपिंग और कम्पोज़िंग भी करते है
‪#‎अब‬ तक कोई भी गीत copy ट्रैक पे नही है
‪#‎आरक्षण‬ गीत खुद ही लिखा और गाया है जो अब तक के सबसे क्रांतिकारी मिशनरी गीतों में शुमार है
‪#‎एक‬ कुशल इंजीनियर भी है
‪#‎उच्च‬ शिक्षा के बावजूद मिशन में निरन्तर सक्रिय B.Tech in Mechanical Engineering
‪#‎खुद‬ ही राष्ट्रिय स्तर पर पहचान बनाई क्योंकि इनको किसी भी बड़ी संस्था सङ्गठन या कम्पनी ने प्रमोट नही किया आज तक कोई भी गीत किसी कम्पनी ने रिलीज नही किया ना कोई CD/DVD आई फिर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुने जाते है गीत

कुल मिलाकर एक कुशल क्रांतिकारी मिशनरी साथी को उनके जन्मदिवस पर दिल से सल्यूट
जय भीम जय भारत

दुनिया के सबसे बड़ा धर्म प्रवर्तक – सिद्धार्थ गौतम बुद्ध

धर्म मनुष्‍य सभ्‍यता के शुरुआती दौर से ही अहम भूमिका निभाता रहा है। दुनिया की सबसे पुरानी और प्राचीन संस्‍कृतियों का संबंध किसी न किसी धर्म से रहा है और ये धर्म अपने प्रचलित धारणाओं के बूते पूरी मनुष्‍य सभ्‍यता, संस्‍कृति को प्रभावित करते रहे हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि सभ्‍यता के इतिहास में पैगम्‍बर, ईश्‍वरीय दूतों ने ही धर्म को शुरू किया और एक तरह से वे धर्म संस्‍थापकों भूमिका में रहे। चाहे फिर वह ईसा मसीह हो, मोहम्‍मद पैगम्‍बर हो, गुरुनानक हो या कोई दूसरा महापुरुष। सभी ने अपनी तरह से पूरी मानवजाति को एकता, भाईचारे और ईश्‍वरीय गुणों की ओर चलने के लिए प्रेरित किया।

भारत से था दुनिया का सबसे बड़ा धर्म प्रवर्तक, दिग्‍गज आधुनिक, विज्ञानवादी भी हुए अनुयायी..!

ज्ञान और आध्‍यात्‍म को लेकर पूरी दुनिया को यदि सबसे ज्‍यादा किसी ने दिया है तो वह भारत ने ही दिया है। ऐसे ही एक महान महापुरुष ने भारत से ही निकलकर पूरी दुनिया को अपने ज्ञान के प्रकाश से भर दिया।

भारतीय उपमहाद्वीप में भी ऐसा ही एक पैगम्‍बर या ईश्‍वरीय दूत रहा, जिसने पुरातन समय से लेकर आधुनिक युग तक पूरी दुनिया को सबसे ज्‍यादा प्रभावित किया और उसे एक तरह से लाइट ऑफ एशिया  कहा गया। इसका नाम था सिद्धार्थ गौतम बुद्ध, जिसने बौद्ध धर्म चलाया और पूरी दुनिया के सामने ईश्‍वर की नई अवधारणा को सामने रखा।

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईस्वी पूर्व हुआ था। गौतम विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक बौद्ध धर्म के प्रवर्तक रहे। उनका जन्म क्षत्रिय कुल के शाक्य नरेश शुद्धोधन के घर में हुआ था। बुद्ध अपने बाल्‍यकाल से ही सभी को प्रभावित करने लगे और युवावस्‍था तक आते-आते विवाहोपरांत नवजात शिशु राहुल, पत्नी यशोधरा को त्यागकर संसार को जरा, मरण और दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश में रात जंगल चले गए। यही वही कहानी है, जो पूरी दुनिया को गौतम के प्रति आज भी आकर्षित करती है।

राजपाट का वैभव छोड़ने के बाद सालों जंगलों, कंदराओं, पहाड़ों की खाक छानने के बाद आखिरकार बुद्ध को  बोधी वृक्ष के नीचे उस ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिसने आगे चलकर बौद्ध धर्म का रूप ले लिया। बुद्ध का ज्ञान प्रचलित धर्मों और खासकर उस दौर के महत्‍वपूर्ण धर्मों हिंदू धर्म और जैन धर्म से बिल्‍कुल अलग था और इसमें सम्‍यक साधना के माध्‍यम से जीवन से दुखों की निवृत्‍ति का मार्ग बताया गया था।

बहरहाल, आज भी पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म सर्वाधिक प्रचलित विश्‍व के सर्वाधिक प्राचीन धर्मों में से एक है। इस धर्म की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह सभी जातियों और पंथों के लिए खुला है। उसमें हर आदमी का स्वागत है। इस धर्म का दरवाजा जात-पात, ऊंच-नीच का कोई भेद-भाव से कोसो दूर रहा।

कमाल यह था कि बुद्ध की मृत्‍यु के बाद दिनों-दिन यह धर्म तेजी से फैलता रहा। सम्राट अशोक भी विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अपनी अहम्‌ भूमिका निभाई। मौर्यकाल तक आते-आते भारत से निकलकर बौद्द धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन, श्रीलंका आदि में फैल चुका था। आश्‍चर्य है कि इन देशों में बौद्ध धर्म बहुसंख्यक धर्म है और गौतम बुद्ध इनके भगवान।

http://khabar.ibnlive.com/news/history/khabar-history-2-478726.html

ये थे दुनिया में चर्चित सबसे महान भारतीय

समाज को बदलने और देश के इतिहास की धारा का रुख मोड़ने वाले कई बार ऐसी नारकीय परिस्‍थितियों के बीच से आते हैं, जहां उनके बचे और बने की रहने की संभावना ही लगातार खतरे में रहती है। ये परिस्‍थितियां ऐसी होती हैं, जहां मनुष्‍य की मनुष्‍य के रूप मे बने और बचे रहने की संभावना कभी छूने से धूमिल होती है, कभी देखने से धराशायी होती है, तो कभी साथ व पास होने से अपमानित होती रहती है।

लेकिन इन्‍हीं परिस्‍थितियों को बदलने के लिए ऐसे मनुष्‍य भी पैदा होते हैं, जो भाग्‍य के भरोसे नहीं, बल्‍कि इन्‍हीं नारकीय परिस्‍थितियों के बीच ऊपजे अपने जीवन संघर्ष से सबकुछ बदल देते हैं। समाज इनके पीछे चलता है और ये राष्‍ट्र के लिए दीपक की भूमिका निभाते हैं जबकि सैकड़ों  पीढ़ियां युगों तक इनके प्रकाश से मार्गदर्शन पाती रहतीहैं।

 

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर भारतीय सभ्‍यता और सामाजिक इतिहास के ऐसे ही एक महापुरुष हैं, जिसने जीवन की बेहद विकट, जटिल, अमानवीय और जातिवाद की कुंठित और लगातार अपमानित करने वाली स्‍थितियों के बीच खुदको जन-जन के बीच स्‍वीकृत और स्‍थापित किया, और एक दिन वे पूरे भारतीय समाज व राष्‍ट्र के लिए मिसाल बन गए।

14 अप्रैल, 1891 को जन्‍में बाबा साहेब एक विश्व स्तर के विधिवेत्ता थे। एक दलित राजनीतिक नेता और समाज पुनरुत्थानवादी इस महान व्‍यक्‍तित्‍व ने भारतीय संविधान के निर्माता की भी भूमिका निभाई।

एक गरीब दलित परिवार में जन्‍म लेने के कारण बाबा साहेब को सारा जीवन नारकीय कष्टों में बिताना पड़ा, लेकिन इन्‍हीं परिस्‍थितियों को बदलने के लिए उन्‍होंने सारा जीवन लगा दिया। उस समय में वे उन अछूतों में से एक थे, जिन्‍होंने कॉलेज की शिक्षा प्राप्त की। उनकी प्रतिभा, बुद्धि और संघर्ष का ही नतीजा था कि कानून की डिग्री प्राप्त करने के साथ ही वे विधि, अर्थशास्त्र व राजनीति विज्ञान में उच्‍च अध्ययन करने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स पहुंचे और कई डॉक्टरेट डिग्रियां भी अर्जित कीं। भारत लौटकर आंबेडकर ने कुछ साल तक तो कोर्ट की प्रैक्‍टिस की, लेकिन जातिवाद में बंटे भारतीय समाज की उन्‍हें चिंता हुई और उन्‍होंने दलितों के लिए काम करना शुरू किया।

बाबा साहेब ने सन् 1927  में छुआछूत के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन शुरू किया और सार्वजनिक आंदोलनों और जुलूसों के द्वारा, पीने के पानी के सार्वजनिक संसाधनों को पूरे समाज के लिए खुलवाने की जंग शुरू की और अछूतों को भी हिंदू मंदिरों में प्रवेश करने का अधिकार दिलाने की नई लड़ाई छेड़ी। अंबेडकर ने दलितों के उद्धार के लिए न केवल जमीन पर, बल्‍कि किताबों, पत्रिकाओं के जरिये एक बौद्धिक लड़ाई भी छेड़ी।

भारत विभाजन के आलोचक रहे बाबा साहेब ने उस दौर में गांधी से लेकर नेहरू, व जिन्‍ना तक सभी नेताओं की आलोचना की। पाकिस्‍तान के विभाजन को लेकर वे राजी नहीं थे, इस पर उनकी पुस्‍तक थॉट्स ऑन पाकिस्तान’ भी चर्चित है।

15 अगस्‍त 1947 को आजाद भारत के वे पहले कानून मंत्री बने और भारत के संविधान निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाई। वे संविधान सभा के अध्‍यक्ष मनोनित किए गए।

अपने जीवन की सांझ बेला में वे बौद्ध धर्म से बेहद प्रभावित हुए और उन्‍होंने 4 अक्टूबर 1956 को नागपुर में अपने 50 हजार समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म को अपना लिया। मधुमेह की बीमारी से ग्रसित बाबा साहेब की 6 दिसम्बर 1956 की मृत्यु हो गई।

http://khabar.ibnlive.com/news/history/br-ambedkar-479034.html