Haryana ka Jadu Song by Sombir Jasrana

On Special Request:  Haryana ka Jadu Song by Sombir Jasrana and AK Hooda Rurkee

 

हरियाणा में एससी बीसी के 16000 पद खाली

हरियाणा सरकार ने नौकरियों में भले ही नए सिरे से आरक्षण तय कर दिया है, लेकिन अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग का बैकलाग आज तक पूरा नहीं हो पाया है। सरकारी विभागों, अर्ध सरकारी विभागों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अनुसूचित जाति (एससी) और पिछड़े वर्ग (बीसी) के हजारों पद खाली पड़े हुए हैं। प्रदेश
सरकार को इन पदों के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। इसके अभाव में सरकार ने खाली पदों को भरने की समय सीमा बताने से साफ इनकार कर दिया है।
विशेष पिछड़ा वर्ग में ग्रुप ए और ग्रुप बी की नौकरियों में आरक्षण का कोटा एक-एक प्रतिशत बढ़ाने से हालांकि पद पहले से अधिक सृजित होंगे, लेकिन सरकार आज तक पिछला बैकलाग ही पूरा नहीं कर पाई है। अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के करीब 16 हजार पद खाली चल रहे हैं।
सरकारी व अर्ध सरकारी विभागों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अनुसूचित जाति के करीब साढ़े 9 हजार पद खाली हैं। इनमें ग्रुप ए व ग्रुप बी 77 पद और ग्रुप सी और ग्रुप डी के 8781 पद का बैकलाग अधूरा पड़ा है। पिछड़े वर्ग में ग्रुप ए व ग्रुप के मात्र 71 पद खाली हैं, जबकि ग्रुप सी और ग्रुप डी के 6260 पद खाली पड़े हुए हैं।
चीफ सेक्रेटरी की ओर से भेजे जा चुके तीन पत्र: कांग्रेस विधायक उदय भान ने विधानसभा में बैकलाग भरने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग कल्याण राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने मुख्य सचिव के 24 सितंबर 2013, 27 मई 2014 और 11 सितंबर 2015 के तीन पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि सभी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा विश्वविद्यालयों को बैकलाग पूरा करने की हिदायतें जारी की जा चुकी हैं। इन हिदायतों का अभी असर देखने को नहीं मिला है।
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आरक्षण के बदले प्रारूप पर अभी गवर्नर के हस्ताक्षर नहीं: विधानसभा में पारित नए आरक्षण विधेयक पर अभी राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। उनके हस्ताक्षर के बाद आरक्षण के नए प्रावधानों पर आधारित अधिसूचना जारी होगी। पिछड़ा वर्ग ब्लाक ए में 71 जातियां शामिल हैं। ग्रुप सी और डी के पदों के लिए 16 प्रतिशत तथा ग्रुप ए व बी के पदों के लिए 11 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। पहले ग्रुप ए व बी के पदों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण मिलता था। पिछड़ा वर्ग ब्लाक बी में ग्रुप सी व डी पदों के लिए 11 प्रतिशत तथा ग्रुप ए व बी के लिए 6 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। ग्रुप ए व बी के लिए पहले 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। पिछड़े वर्ग ब्लाक सी की नई कैटेगरी बनाई गई है, जिसमें ग्रुप सी व डी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण तथा ग्रुप ए व बी के लिए 6 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। ग्रुप ए व बी के लिए पहले 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।

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आरक्षण के रण पर बेबाक बोल: हक-बंदी

 

भारतीय जनता पार्टी की सरकार में आरक्षण के मुद्दे पर सब कुछ ठीक नहीं है। हरियाणा महज इसका ताजा उदाहरण है। इसका कड़वा स्वाद पार्टी हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में चख चुकी है। लेकिन सबक सीखने का शायद भाजपा में रिवाज नहीं है। पिछले एक साल से भी ज्यादा समय में जो भी विवाद हुए उनसे पार्टी ने शायद ही कभी उबरने की कोशिश की हो, ज्यादातर मामलों में हठधर्मिता ही दिखाई है। यही हाल उसकी हरियाणा की राज्य सरकार का भी है। हरियाणा में भी केंद्र की तर्ज पर ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे मनोहर लाल खट्टर की अगुआई में सरकार बनाई गई जो गठन के बाद अपने ही फैसलों के जाल में उलझती चली गई। नतीजा यह रहा कि राज्य में उबाल आ गया और समुदायों के बीच जातीय आधार पर एक विभाजक रेखा खिंच गई। खट्टर के साथ विडंबना यह रही कि एक साल में उनके राजनीतिक समर्थकों और चुनिंदा ‘अपने’ नौकरशाहों ने उन्हें राज्य और उसकी नब्ज को पहचानने की नौबत ही नहीं आने दी। खुद मुख्यमंत्री भी ‘स्वयंसेवकों’ के भरोसे रहे। आरक्षण पर जो कुछ राज्य में हुआ वह अचानक नहीं था, वरन उसकी भूमिका पहले से बन रही थी। लेकिन खट्टर को जमीन से जुड़ने का मौका ही नहीं दिया गया। उनके अपने मंत्रियों ने उनसे सहयोग नहीं किया और उनकी खुफिया एजंसियां भी ऐतिहासिक नाकामी दिखा गर्इं। दहकती आग में घी डालने के लिए प्रदेश में कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल तो थे ही। यही वजह रही कि हालात समझ में आने से पहले ही बेकाबू हो गए। लेकिन केंद्र की चिंता उससे कहीं आगे है। एक उग्र प्रदर्शन के आगे घुटने टेकने की जो फजीहत झेलनी पड़ रही है वह अलग और इस मामले में जो एक अनचाहा रास्ता निकालना पड़ा वह अलग। देश की सरकार तीन दिन तक इस प्रदर्शन का दमन करने का रास्ता खोजती रही और उसमें देश के जेम्स बांड का दर्जा पा चुके सुरक्षा सलाहकार से लेकर सेना और केंद्रीय गृह मंत्रालय के आला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। लेकिन हल कोई नहीं और अंत में प्रचंड बहुमत से बनी एक सर्वशक्तिमान सरकार को मिमियाते हुए समर्पण करना पड़ा। राज्य सरकार की अकर्मण्यता तो शायद फिर भी अपने लिए कोई सफाई ढूंढ़ ले लेकिन केंद्र के धुरंधर इससे कैसे बचाव का रास्ता तलाश करेंगे, यह देखने की बात होगी। जाटों को आरक्षण के मामले में पहले राज्य सरकार और बाद में केंद्र सरकार जाट नेताओं को वस्तुस्थिति समझाने में नाकाम रही। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो जाटों को आरक्षण देना मान ही लिया था। उससे पहले केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने जाटों को आरक्षण के नाम पर राजस्थान में वोट लूट लिए थे और अपनी सरकार जमा ली थी। राजस्थान में भाजपा को इसका भारी फायदा मिला। हरियाणा में जाटों ने आरक्षण लेने के लिए क्या-क्या नहीं किया!

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